मुख्यमंत्री ने जैसलमेर व जोधपुर कलेक्टर को निर्देश दिए कि घायल बच्चों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए। इस पर कलेक्टर व संभागीय आयुक्त घायल बच्चों की कुशल क्षेम पूछने एम्स पहुंचे।

फलसूंड अस्पताल में गुरुवार के दृश्य किसी की भी आंखें नम कर सकते हैं। बच्चे दर्द से चीख रहे थे और उनकी उनकी पीड़ा देख परिजनों के आंसू नहीं रुक रहे थे। गुरुवार सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के थोड़ी देर बाद जैसे ही हादसे की सूचना मिली, बदहवास परिजन अस्पताल की तरफ दौड़े। कोई अपने बेटे तो कोई पोते को ढूंढते हुआ फलसूंड से जोधपुर पहुंचा।

हादसे के बाद बच्चों को जोधपुर भेजा गया था। इस दौरान बच्चों के साथ उनका अपना कोई नहीं था। बच्चे मम्मी-पापा के पास जाने व उनसे मिलने के लिए रोते-बिलखते नजर आए। किसी का हाथ फ्रैक्चर हो गया तो किसी की गर्दन पर चोट है। चेहरे, हाथ व शरीर के दूसरे हिस्सों पर गाड़ी के कांच चुभे हुए थे। हादसे में 22 बच्चे घायल हो गए, जिनमें 2 क्रिटिकल हैं। इसमें एक का सीधा हाथ फ्रैक्चर हो गया और दूसरे के हैड इंजरी है। वे ओटी में हैं। घायल बच्चों को पांचवें फ्लोर पर बनाए ए वार्ड में भर्ती किया है।

हादसे के बाद बच्चों को जोधपुर लाया गया था। किसी का हाथ फ्रैक्चर हो गया तो किसी की गर्दन पर चोट है।

आंखों में दिख रहा हादसे का खौफ
एम्स की पांचवी मंजिल स्थित वार्ड के बाहर परिजनों की भीड़ नजर आई। आनन-फानन में परिजन बच्चों को ढूंढते हुए एम्स पहुंचे। किसी को हादसे के एक घंटे बाद सूचना मिली तो किसी के पास हादसे का वीडियो पहुंचा तो घटना का पता चला। हादसे के बाद से बच्चे इतने सहमे हुए थे कि कोई कुछ नहीं बता पा रहा था। एम्स में 5 से लेकर 14 साल तक के बच्चे भर्ती हैं।

पहली बार स्कूल भेजा था, हादसे ने दिल दहलाया
7 साल का महावीर पहली बार ही स्कूल गया था। उसकी मां ने कहा कि करीब 12 बजे हादसे के बारे में पता चला। फलसूंड के अस्पताल पहुंचे बच्चा नहीं दिखा तो जोधपुर रवाना हुए। 4 बजे जोधपुर पहुंचे और बच्चे को देखा तो तसल्ली हुई। महावीर की मां अणची देवी ने बताया कि उसके पिता अरब में कमाने गए हुए हैं। वह अपनी ननद के साथ जोधपुर आई। उसने कहा महावीर मना कर रहा था स्कूल जाने से, लेकिन दो साल कोरोना की वजह से समय खराब हो गया था, ऐसे में जबरदस्ती स्कूल भेजा। क्या पता था यह हादसा हो जाएगा।

मंसूर का हाथ फ्रैक्चर हो गया
मोहम्मद खां अपने भतीजे मंसूर दीन को लेकर एम्स पहुंचे। उसने बताया कि 14 वर्षीय भतीजे की हालत सही है अभी। हाथ में फ्रेक्चर हुआ है और गर्दन के पास कांच चुभ गए । मोहम्मद खां ने बताया कि मिनी बस में क्षमता से अधिक बच्चे भर रखे थे। जिस जगह हादसा हुआ वहां गोलाई थी। बस स्पीड में होने से ड्राइवर संभाल नहीं पाया और पलट गई।

पोते को देखने के बाद आएगा चैन
इस्तेखां हादसे के बाद पोते को देखने के लिए जोधपुर एम्स आए। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने अभी तक उसके पोते से नहीं मिलवाया है। इस्तेखां के पोते अस्कर की हालत गंभीर बताई जा रही है। अभी वह आईसीयू में है। इस्तेखां ने बताया कि एक झलक पोते की देख ले तभी उनको तसल्ली होगी।

मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने जैसलमेर व जोधपुर जिला कलेक्टर को निर्देश दिए कि घायल बच्चों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए। इस पर जिला कलेक्टर व संभागीय आयुक्त घायल बच्चों की कुशल क्षेम पूछने एम्स पहुंचे। जिला कलेक्टर हिमांशु गुप्ता, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सुराना व संभागीय आयुक्त डॉ राजेश शर्मा ने बस दुर्घटना में घायल हुए बच्चों की कुशल क्षेम जानी।


गुरुवार सुबह पलटी बस
बता दें कि आज सुबह जैसलमेर के फलसूंड में स्कूली बच्चों की बस पलट गई थी। बताया जा रहा है कि बस में क्षमता से ज्यादा बच्चे सवार थे। तेज रफ्तार में होने से चालक मोड पर बस को संभाल नहीं पाया। और गोलाई के मोड़ पर संतुलन खो बैठा। बच्चों को तुरंत फलसूंड के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। 22 बच्चे घायल हो गए और 2 बच्चों की मौके पर मौत हो गई।

बेसुध हालात में 19 बच्चों को लाया जोधपुर AIIMS:हॉस्पिटल में दर्द से तड़पते रहे, गांव के लोग बोले: ठूंस-ठूंस कर बच्चों को बस में बैठाया

फलसुंड में हुए स्कूल बस हादसे में दो बच्चों की मौत हो चुकी है। दो बच्चों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। इधर, इस हादसे में घायल 19 बच्चों को जोधपुर एम्स रेफर किया गया। जब एक के बाद एक एंबुलेंस एम्स पहुंची तो वहां एक बार के लिए अफरा-तफरी मच गई।

जोधपुर एम्स की इमरजेंसी में बच्चों को उपचार के लिए लाया गया। सुबह पहले 4 गाड़ियों में 10 घायल बच्चों को रेफर किया गया। इनमें 4 गंभीर घायल थे। बेसुध हालात में बच्चे तड़प रहे थे। इन्हें स्टाफ ने संभाला और इलाज शुरू किया। बच्चे इतने घबराए हुए थे कि कुछ बोल नहीं पा रहे थे। 17 बच्चे अलग-अलग वार्ड में भर्ती है। इन बच्चों को लेकर आए फलसुंड के अर्जुन कुमावत ने बताया कि मौके के हालात इसे भी खतरनाक थे। रास्ते में खून और बच्चों के बैग बिखरे थे। बस में करीब 30 से 40 बच्चे सवार थे। ऐसे लग रहा था जैसे बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया हो। ड्राइवर की लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ। इस हादसे में दो बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

यह बच्चे हुए घायल
इस हादसे में अब्दुल, सिंकदर, यासीन, हुसैन, आमीन, असलम, बरकत, हमीर, अशरफ, सत्तार, दिलभर, हुसैन, नाशर, आवेश, महबूब, बाबू, लश्कर, रिजमान और मनार घायल हो गए।

बच्चे समझ नहीं पा रहे थे कि उनके साथ हुआ क्या है
बेसुध हालत में बच्चे एम्स पहुंचे। फलसुंड से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एम्स रेफर किया गया। बच्चों को होश ही नहीं था कि उनके साथ हुआ क्या था। किसी के हाथ तो किसी के सिर पर पट्‌टी बंधी थी। दर्द से कहराते हुए बच्चे अपने मां-बाप को याद कर रहे थे। वहां मौजूद स्टाफ ने उन्हें समझाया और बताया कि उनके मां-बाप आ रहे हैं। देर शाम तक अधिकांश बच्चों के मां-बाप एम्स पहुंचे। बताया जा रहा है कि इस हादसे में वे इतने घबरा गए कि वे बता भी नहीं पा रहे हैं कि उनके साथ हुआ क्या है।

तीन बच्चों की मौत की सूचना अफवाह निकली
घायल बच्चों में एक की हालत गंभीर है। बाकी बच्चे सकुशल है। फलसुंड से जोधपुर रेफर के दौरान अफवाह फैलाई गई कि तीन बच्चों की मौत हो गई। जबकि बच्चे सकुशल है। बच्चों की मां-बाप भी एम्स पहुंचे। हादसे की सूचना पर कलेक्टर भी मौके पर पहुंचे और बच्चों से घटना की जानकारी ली।

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Desert Darshan

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